बीजिंग:चीन एक बार फिर से सीमा तनाव (Border Dispute) पर भारत के खिलाफ दोष डालने का गंदा खेल खेल रहा है. चीन ने बुधवार को दावा किया कि वह भारत के साथ किए समझौतों का सम्मान करता रहा है और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. चीन का यह बयान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) के उस बयान के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने चीन पर सीमा के आरोप लगाया था. रक्षा मंत्री ने संसद को बताया था कि चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैनिकों के भारी जमावड़ा करने में लगा हुआ है, आक्रामक व्यवहार करते हुए मौजूदा सीमा समझौतों और संधि के उल्लंघन में यथास्थिति को बदलने की मांग कर रहा है.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दिया ये बयान...

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने हाल ही में भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हुए संघर्ष के लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराया है. हम चीन और भारत के बीच किए गए समझौतों का सम्मान कर रहे हैं. चीन की सत्ताधारी पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के अनुसार विदेश मंत्रालय की दैनिक ब्रीफ़िंग में प्रवक्ता ने कहा कि पहले भारत ने द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन किया. पहले हमला किया और चीनी सीमा सैनिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए गोलीबारी की. भारतीय पक्ष के लिए यह जरूरी है कि वह सैन्य शक्ति को कम करने से जुड़े समझौता करे और सीमा स्थिति को आसान बनाने के लिए ठोस कदम उठाए.

भारत ने खारिज किये सभी आरोप
भारत ने पहले ही चीन द्वारा लगाए गए उन आरोपों को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों को उकसाया और भड़काया गया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने भारत सरकार की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि LAC का कड़ाई से सम्मान और पालन किया जाना चाहिए क्योंकि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द का आधार बनता है.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने विदेश मंत्रालय के शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच हुई हालिया बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि मॉस्को की बैठक के दौरान दोनों विदेश मंत्रियों की सीमा स्थिति पर पांच बिंदुओं पर सहमति बनी थी. हमें उम्मीद है कि भारत चीन के साथ समझौते पर चलने के लिए काम करेगा और पहले हुए समझौतों का सम्मान भी करेगा और सीमा मुद्दे को चीन भारत संबंधों की बड़ी तस्वीर में एक महत्वपूर्ण जगह देगा.