दौसा:मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना ने प्रदेष के लिए पानी का सकंट हरण करने का काम किया है। सीएम की दूरगामी सोच ने इस योजना को वो मुकाम दिया जिससे प्रदेष की जनता को पेयजल की समस्या हो या फिर सिंचाई की बड़ी राहत दी है। दौसा जिले की बात करे तो मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना के तहत जहां पुराने जल स्रोतो की मरम्मत कर बारीश का पानी सकंलन करने के लिए उनको तेयार किया गया है। वहीं कुछ नए स्रोतों को भी बनाने का काम किया जा रहा है। साथ ही उन स्रोतो में बारीश का पानी आने में जो रूकावटे हो रहीं थीं उन्हे भी हटाया गया है जिससे बारीश का पानी उनमे अधिक पहुंच सके।

दौसा जिला मूख्यालय की बात करे तो यहां प्राचीन समय की बनी हुई कुछ बावड़ियां थी जिनमे उस समय बारीश का पानी सकंलन होता था लेकिन देखरेख के अभाव में वो जीणषीर्ण हो गई थीं लेकिन विधायक शकंर शर्मा की उन बावड़ियों पर निगाह गई तो विधायक ने उनको फिर से तैयार करने का मन बनाया और मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना के तहत आज वो बावड़ियां जो हमारी स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना भी है वो फिर से जी उठी। वहीं उन बावडीयों मे बारीश का पानी आने वाले रास्ते भी अवरूद्व हो गए थे जिन्हे फिर से चालु करवाया गया तो अब इन बावड़ियों मे बारीश का पानी आने लगा है। बावड़ियां सुदंर दिखे ओर लोगो का इनकी ओर रूख हो इसके लिए बावड़ियों की दिवारो पर चित्रकारी भी करवायी गई है जिसके चलते अब ये बावड़ियां खंडरों की जगह मूह बोल रही है।

विधायक शकंर शर्मा ने कहां जब मैं दौसा से विधायक बना था तो दौसाके पानी के हालात बेहद खराब थे ओर यहां के तालाब एनिकट। यहां तक की हमारे पुर्खो द्वारा बनाई गईं वो बावड़ियां जो प्राचीनकाल मे पानी सकंलन करने का एक मात्र स्रोत हुआ करती थी वो पुरी तरह जीर्णषीण हो गईं थी और लोगों ने उनमे कचरा भर दिया था। लेकिन मैने मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना के तहत द्वितिय चरण मे उन बावड़ियों की साफ सफाई करवायी ओर उनकी टूट फूट की मरम्मत करवायी तो आज वो फिर से बारीश का पानी सकंलन करने का बड़ा स्रोत बन गयी है। हांलाकि,इस बार बारीश थोड़ी कम हुई जिसके चलते उनमे पानी कम आया है लेकिन भविष्य के लिए ये बावड़ियां दौसा शहर की पानी की समस्या दुर करने में बडा़ वरदान साबीत होंगी। जैसे जैसे इन जल स्रोतो मे बारीश का पानी आने लगा है वैसे वैसे ही इनके आसपास के नलकूप रिर्चाज होने लगे है ओर जो हैण्डपम्प ओर नलकूप सूख गए थे उनमे फिर से पानी आने लगा है।

सरकारी आकंडो की बात करें तो दौसा जिले में मुख्यमंत्री जिले स्वावलम्बन अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र मे सात हजार से भी अधिक काम करवाए गए हैं। जिनमे पुराने जल सकंलन स्रोतो के अलावा खेत का पानी, खेत में रूके और नये जल सकंलन स्रोत भी विकसीत किए गए हैं। दौसा जिला परीषद के सीईओ राजेन्द्र चतुर्वेदी ने बताया की मुख्यमंत्री जल स्वावम्बन अभियान मे हुए कामों की बदोलत तालाबो ओर बावड़ियां की मरम्मत करवाने के बाद उनमे बारीश के पानी की आवक होने लगी है जिसके चलते आसपास के कुओं और नलकूपो का जल स्तर बढ़ा है जिससे किसानो को खेती मे अच्छी उपज मिलेगी।

मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन सीएम राजे की दुरगामी सोच है ओर यह योजना प्रदेश का पानी का सकंट दुर करने मे वरदान साबीत हो रही है। इससे वर्तमान ही नहीं भविष्य के परीणाम भी बेहतर आयेगें। मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना से प्रदेश का जहां पेयजल की समस्या का समाधान हो रहा है। वहीं खेत का पानी खेत मे ही रूके इससे किसानो को कृषी उत्पादन मे भी बड़ा लाभ होगा।