भारतीय मूल की डॉक्टर पूर्णिमा नायर का मंगलवार को इंग्लैंड (England) में कोरोनावायरस (Coronavirus) के संक्रमण की वजह से निधन हो गया. उत्तर-पूर्वी इंग्लैंड के एक अस्पताल में कोरोना वायरस से लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली. डॉ पूर्णिमा नायर इंग्लैंड में उन प्रतिष्ठित फ्रंट लाइन डॉक्टरों में से एक थीं जो कोरोना मरीज़ों के इलाज में सबसे आगे रहीं.

डॉ पूर्णिमा नायर मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली थीं. इंग्लैंड के काउंटी डरहम में बिशप ऑकलैंड के स्टेशन व्यू मेडिकल सेंटर में काम करती थीं. वो काफी प्रतिष्ठित डॉक्टरों में शुमार करती थीं.

कोरोना पॉज़िटिव होने के बाद डॉ नायर ने लंबे समय तक कोरोनावायरस से संघर्ष किया. आखिरी दिनों में हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर का सपोर्ट दिया गया. 27 मार्च से डॉ नायर लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थीं लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. स्टॉकटन ऑन टीज में नॉर्थ टीज हॉस्पिटल के यूनिवर्सिटी अस्पताल में उनकी कोविड 19 बीमारी से मृत्यु हुई. डॉ नायर को कोरोना संक्रमण के अलावा दूसरी कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं थी.
55 वर्षीय डॉ पूर्णिमा नायर ब्रिटेन में कोरोनावायरस के खिलाफ फ्रंटलाइन पर काम के दौरान जान गंवाने वाली दसवीं जनरल प्रैक्टीशनर मानी जा रही हैं. कोरोनावायरस की वजह से ब्रिटेन में अब तक 32 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

डॉ नायर की मृत्यु की खबर से सोशल मीडिया पर उनके रिश्तेदारों, मित्रों के अलावा मेडिकल कम्युनिटी से शोक संदेश का सिलसिला जारी है. सभी उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए इसे बेहद ही दुखद और अपूर्णनीय क्षति बता रहे हैं. डॉ नायर के तमाम मरीज़ों में से एक ने 10 साल पहले अपनी मां की जान बचाने के लिए उनका शुक्रिया किया और लिखा, ‘ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दे. आपने 10 साल पहले मेरी मां की ज़िंदगी बचाई थी. इसके लिए हम जीवनभर आपके आभारी रहेंगे.’

मेडिकल सेंटर ने अपने शोक संदेश में लिखा कि कोरोना संक्रमण की वजह से डॉ नायर का निधन हुआ और उन्होंने आखिरी सांस तक बेहद मजबूती से सामना किया. डॉ नायर के परिवार में पति और एक बेटा हैं.