नई दिल्ली:कृषि क्षेत्र के जानकारो का कहना है कि पारंपरिक बीज से अलग काले गेंहू का शोधित बीज अपनाएंगे तो निश्चित रूप से उपज के साथ आय में भी इजाफा होगा. कई किसान काला गेहूं की खेती (Black Wheat Farming) कर बंपर कमाई कर रहे हैं.. काले गेहूं की फसल को कृषि विभाग के अधिकारी अच्छा संकेत मान रहे हैं. कृषि अधिकारी मानते हैं कि ये गेहूं डायबिटीज वाले लोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद है. मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में धीरे-धीरे काला गेहूं की फसल की बुवाई का रकबा बढ़ रहा है.

30 नवंबर से पहले करें बुवाई
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा समय काला गेहूं खेती के लिए उपयुक्त है, क्योंकि इसकी खेती के लिए खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए. किसान 30 नवंबर तक की इस गेहूं की बुवाई आसानी से कर सकते हैं. अगर इसकी बुवाई देर से की जाए, तो फसल की पैदावार में कमी आ जाती है. जैसे-जैसे बुवाई में देरी होती है, वैसे-वैसे गेहूं की पैदावार में गिरावट आ जाती है.

4 से 6 हजार की कीमत पर बिकता है काला गेहूं
यूपी के रायबरेली में पिछले साल महज 8 किसानों ने काला गेहूं की खेती की थी, लेकिन इस साल लगभग करीब 100 से अधिक किसानों ने काला गेहूं की बुवाई (Black Wheat Sowing) की तैयारी शुरू कर दी है. इसकी खेती की खासियत यह है कि फसल का न सिर्फ उत्पादन अधिक होता है, बल्कि यह मार्केट में 4,000 से 6,000 हजार रुपए प्रति क्विंटल की कीमत पर बिकता है, जो कि अन्य गेहूं की फसल से दोगुना है. इसी साल सरकार ने गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,975 रुपये प्रति ​क्विंटल तय किया है. इस हिसाब से देखें तो काला गेहूं की खेती से किसानों की कमाई तीन गुना तक बढ़ सकती है.

ऐसे करें बुवाई
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, किसानों को काला गेहूं की बुवाई सीडड्रिल से करनी चाहिए. ऐसा करने से उर्वरक और बीज की अच्छी बचत की जा सकती है. काला गेहूं की उत्पादन सामान्य गेहूं की तरह ही होता है. इसकी पैदावार 10 से 12 क्विंटल प्रति बीघे होती है. किसान बाजार से बीज खरीद कर बुवाई कर सकते हैं. यह सीजन इसकी बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है.