इलाहाबाद, भारतीय जनता पार्टी को एक बार फिर इलाहाबाद में हार का मुंह देखना पड़ा है। यह लगातार तीसरी बार है जब स्थानीय चुनाव में भाजपा की रणनीति धराशायी हो गई है। इस बार तो भाजपा को बिना लड़े ही हार का सामना करना पड़ा है। मामला इलाहाबाद के मांडा ब्लाक प्रमुख की कुर्सी का है। यह सीट सपा के कब्जे में है। इसे हासिल करने के लिये भाजपा ने अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा था। अविश्वास प्रस्ताव के लिये वोटिंग होनी थी। लेकिन बड़े ही नाटकीय ढंग से भाजपा समर्थित प्रत्याशी ब्लाक ही नहीं पहुंची। सियासी घटनाक्रम ने भाजपा को जहां बिना लड़े चुनाव से बाहर कर दिया।वहीं सपा के पाले में फिर से कुर्सी बरकरार रख भाजपा के लिए करारा झटका भी दे दिया। याद दिला दें कि इससे पहले जिले के होलागढ ब्लाक में प्रमुख की कुर्सी हथियाने के लिये भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी।

भाजपा की यहां जीत तय मानी जा रही थी। लेकिन ऐन मौके पर सपा प्रमुख श्रद्धा तिवारी, राजा भैया के शरण में पहुंची। जिसके बाद पूरा सियासी समीकरण ही बदल गया और फिर से होलागढ की कुर्सी सपा के ही खाते में बनी रही। वहीं सबसे बड़ा झटका तो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के गढ़ में मिला था। जब जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट से भाजपा को हाथ धोना पड़ा था। इस चुनाव में केशव की बेहद नजदीकी व चुनाव से पहले अध्यक्ष रही मधु वनस्पति भाजपा की ओर से चुनाव में थी।

लेकिन भाजपा का कमल नहीं खिला सकी और सपा प्रत्याशी से एकतरफा चुनाव हार गयी थी। इलाहाबाद की मांडा ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर सपा समर्थित सरोज यादव का कब्जा था । भाजपा द्वारा सरोज यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। आज मतदान से सब कुछ तय होना था। लेकिन भाजपा समर्थित निशा यादव खुद ही मतदान में हिस्सा लेने नहीं पहुंचीं। जबकि निशा ने पिछले चुनाव में सरोज को कड़ी टक्कर दी थी। लेकिन तब फर्क यह था कि दोनों सपा नेत्री थी। लेकिन इस बार निशा ने भाजपा का दामन थाम लिया था। सुबह पूरा प्रशासनिक महकमा ब्लॉक मुख्यालय पर जुटा रहा। लेकिन जब निशा ही नहीं पहुंची तो कोरम के अभाव में अविश्वास प्रस्ताव नहीं हो सका और फिर से सपा की साइकिल मांडा में दौड़ पड़ी।