जयपुर: बीते विधानसभा और लोकसभा चुनावों में दलित वर्ग के बड़े समर्थन के कारण बीजेपी को सर्वाधिक सीटें मिली, कांग्रेस एक भी एससी रिजर्व सीट नहीं जीत पाई। उपचुनावों में जरुर वैर सीट को कांग्रेस ने जीता। मौजूदा उपचुनाव में कांग्रेस एक बार अपने परम्परागत वोटों को लेती हुई नजर आई है। 3 उपचुनावों में तकरीबन 5 लाख वोट दलित वर्ग के है और कांग्रेस ने इन्हीं वोटों में मजबूत सेंध लगाई थी। बीकानेर में बीजेपी SC सम्मेलन के जरिये अमित शाह ने मजबूत वोट बैंक पर फोकस किया। 

राजस्थान में दलित समाज बहुतायत में निवास करता है। राजनीतिक तौर पर भी यह जागरुक समाज है। श्रीगंगानगर एससी रिजर्व लोकसभा क्षेत्र सम्पूर्ण भारत में सर्वाधिक दलित बहुल आबादी वाला क्षेत्र कहलाया जाता है। सबसे राजस्थान में चुनाव हो रहे है। 1952 से ही लगातार कांग्रेस पार्टी का दलित वर्ग में दबदबा रहा है। दलित वर्ग से जुड़ी कुछ जातियां खासतौर पर कोली, रैगर, जाटव और बाल्मिकी जातियों का कुछ हद तक झुकाव बीजेपी की ओर रहा है। दलितों में सर्वाधिक प्रभुत्व वाली मेघवाल औऱ बैरवा जातियां कांग्रेस के साथ खड़ी नजर आई। समय बदला तो बीजेपी ने धीरे धीरे सेंध लगाई। बीजेपी ने.पहला बड़ा राजनीतिक कार्ड खेला था जब भैरों सिंह शेखावत ने अपने मुख्यमंत्रीत्व काल में कैलाश मेघवाल को राज्य का गृह मंत्री बनाया। इसके बाद वसुंधरा राजे ने अपनी पहली सरकार और दूसरी सरकार में भी दलितों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिये। पहली बार विधानसभा अध्यक्ष कोई दलित बना। 

बाबू लाल वर्मा को राजे सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया वहीं अनिता भदेल और कमसा मेघवाल राज्य मंत्री बने। कैलाश वर्मा औऱ जितेन्द्र गोठवाल जैसे युवा दलित चेहरों को संसदीय सचिव पद से नवाजा गया। मोदी सरकार भी पीछे नहीं रही और दलित चेहरे बीकानेर सांसद अर्जुन राम मेघवाल को केन्द्रीय मंत्री बनाया गया। पहले वित्त राज्य मंत्री और बाद में जल संसाधन मंत्री। प्रतिनिधित्व का कारण भी साफ था कि दलित वर्ग के बेजोड़ सहयोग के कारण ही विधानसभा और लोकसभा चुनाव जीते। 

अजमेर, अलवर और मांडल गढ 3 उपचुनावों के नतीजे बीजेपी के लिये चौंकाने वाले रहे थे। इसके बाद से ही बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने टारगेट कर दिया था SC को। पहले उन्होंने उस कैडर में जोश भरने की सोची जो बीजेपी की दलित लीडरशीप कहलाती है। बीकानेर को इसलिये चुना क्योंकि राजस्थान में बीजेपी के सबसे बड़े दलित नेता अर्जुन राम मेघवाल इसी क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व करते है। मेघवाव वोट राजस्थान में सर्वाधिक माने जाते है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उसी अजमेर में आ रहे है जहां के एससी वोटर्स ने बीते उपचुनाव में BJP की साथ दिया था। सूत्रों के मुताबिक जो रिपोर्ट सामने BJP को मिली थी 70 से 80 फीसदी दलित वोटों का झुकावा तीन उपचुनाव क्षेत्रों में कांग्रेस की ओर नजर आया है। यहां की एससी रिजर्व सीटों पर भी कांग्रेस की बढ़त रही और बीजेपी पीछे नजर आई।

अजमेर लोकसभा क्षेत्र एससी मतदाता
कुल एससी मतदाता - 396614 (लगभग)

विधानसलभा वार आकलन
-किशनगढ-54103
-पुष्कर-39099
-अजमेर नार्थ-27765
-अजमेर साउथ(sc)-81145
-नसीराबाद-41974
-मसूदा-43663
-केकड़ी-58691
-दूदू(sc)-50174

अलवर लोकसभा क्षेत्र एससी मतदाता
कुल एससी मतदाता - 399487(लगभग)

विधानसभा वार आकलन
-तिजारा-38163
-किशनगढ-56449
-मुंडावर-46789
-बहरोड़-39278
-अलवर ग्रामीण(sc)-63167
-अलवर शहर-48330
-रामगढ-55513
-राजगढ़-51798

मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र एससी मतदाता
कुल मतदाता - 50366लगभग

उपचुनावों में रिजर्व सीटों की स्थिति
-अजमेर दक्षिण एससी रिजर्व सीट पर कांग्रेस को मिली 13070वोटों की बढ़त
-जबकि पिछले लोकसभा चुनावों में यहां बीजेपी को बढ़त थी 28760की
-32सालों बाद मिली यहां कांग्रेस को बढ़त
-अलवर ग्रामीण एससी रिजर्व सीट पर कांग्रेस को 32273वोटों की बढ़त मिली
-जबकि पिछले लोकसभा चुनावों मे ंयहां बीजेपी को बढ़त थी 8968की
-कांग्रेस ने बीजेपी की बढत नहीं तोड़ी बल्कि इसे तिगुना कर दिया
-दूदू एससी रिजर्व सीट पर कांग्रेस को मिली 7560वोटों की बढ़त मिली
-जबकि दूदू में 26428वोटों की बढ़त मिली
-SCवोटों का यह गणित बीजेपी के लिये चिंता जनक था

बीकानेर से कैसे मजबूत करेंगे दलित वोट को शाह
-SC आरक्षण से जुड़े भ्रम को खत्म करने के प्रयास 
- वोटों के लिये BJP के दलित नेताओं को शाह का मूलमंत्र 
-समाज के बीच जाकर संदेश दो BJP साथ साथ
-कांग्रेस के आरक्षण से जुड़े कु प्रचार को जबाव दो
-बूथ स्तर पर बीजेपी का SC नेटवर्क तैयार रहे
-चुनावी सिस्टम में SC सीटों पर नये समीकरण बनाये जाएंगे
-बीजेपी के सामान्य वर्ग के वोट बैंक के साथ खाई को पाटा जायेगा
-लोगों को समझाया जाएगा मोदी राज में दलित बढ़ेगा आगे

राजस्थान के तमाम दिग्गज दलित नेताओं को बीजेपी ने एससी बूथों पर मोर्चे पर लगाया था। उपचुनावों में एससी वर्ग को साधने के लिये बीजेपी ने पार्टी के एससी मोर्चे के माध्यम से भी अलग रणनीति तैयार की थी। लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद बीजेपी से दलित वोट छिटक गया। दलित वोटों का खिसकना वो भी लोकसभा उपचुनावों में यह केवल राज्य बीजेपी ही नहीं बल्कि केन्द्रीय बीजेपी के लिये भी चिंताजनक है। केवल कांग्रेस को वोट पड़ने वाले दलित वर्ग की चिन्हित जातियां ही नहीं टूटी बल्कि वो भी वोट टूटे जो बीजेपी को पड़ते थे। जाहिर है मिशन 2018 और मिशन 2019 के लिये बीजेपी को अब दलित वोटों के साधने के लिये नवीन रणनीति बनानी पड़ी। भारत बंद समेत कई घटनाक्रम सामने आ गये। 

अमित शाह नेे मौजूद परिस्थितियों को भाांपते हुये मेघवाल वोटों के सियासी केन्द्र बीकानेर का रुख किया। राजस्थान में बीजेपी के आलाकमान ने दलित वोटों की रणनीति के लिये अर्जुन राम मेघवाल पर विश्वास जता रखा है। वो मोदी सरकार में मंत्री तो है ही संघ केे भी पसंंदीदा चेहरे है। चुनाव प्रबंधन समिति का भी मेघवाल को उप संयोजक बनाया गया। शाह की बीकानेर रैली का कितना असर दलित वोटों पर पड़ेगाा यह चुनावी गणित ही तय करेगा। एक बात जरुर बीजेपी के लिये शायद ठीक हो गई है कि कांग्रेस और मायावती ने राजस्थान में हाथ नहीं मिलाया।