धौलपुर, जिले के सरमथुरा उपखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरौली पर प्रसव के बाद प्रसूता महिलाओं को अपने नौनिहालों के साथ जमीन पर लेटकर उपचार कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके चलते यहां नवजात में संक्रमण फैलने का खतरा मंडरा रहा है,वहीं प्रसूता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मामले को लेकर अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि अस्पताल में मात्र छह बेड उपलब्ध हैं, जबकि दो दिन में 13 महिलाओं के डिलेवरी हुई है। ऐसे में आधी से अधिक प्रसूताएं जमीन पर लेटने को विवश हैं।

आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरौली का दर्जा देते हुए भव्य उद्घाटन समारोह में 24 घंटे बेहतर चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, लेकिन वास्तविकता में अस्पताल के अंदर प्रसव के लिए भर्ती महिलाओं को ही जब समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं हो पा रही है तो क्या बेहतर चिकित्सा व्यवस्थाएं उपलब्ध होंगी? यह एक बड़ा सवाल है। अस्पताल में प्रसूता और उनके नौनिहाल जमीन पर लेटने को मजबूर हो रहे हैं और वही नर्सिंग स्टाफ जूते पहनकर काम कर रहे हैं। जूतों के साथ गंदगी अंदर आ रही है। ऐसे में यदि नवजात शिशुओं में संक्रमण फैलता है या प्रसूता किसी बीमारी की शिकार होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।