नई दिल्ली:खूबसूरत दिखने के लिए हम क्या-क्या नहीं करते. फेस वॉश से लेकर लिप्स्टिक, स्क्रब, क्रीम, सनस्क्रीन सभी कुछ अपनी त्वचा पर थोपते रहते हैं. लेकिन, क्या कभी हमने ये सोचा है कि ये  कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स  हमें फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकते हैं और हमें इसकी खबर तक नहीं होती. जी हां, टॉक्सिक लिंक की एक स्टडी बताती है कि इन कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में माइक्रोबेड्स होते हैं जो हमारे शरीर-त्वचा के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी बहुत हानिकारक हैं. लेकिन बीआईएस की ओर से ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर किसी तरह के कोई नियम नहीं है.

टॉक्सिक लिंक द्वारा की गई इस स्टडी में पहली बार सामने आया है कि इंडियन ब्यूटी प्रोडक्ट्स जैसे फेस वॉश, स्क्रब, क्रीम आदि में माइक्रोबेड्स की मात्रा बहुत ज्यादा होती है.1 मिलीमीटर जितने छोटे ये माइक्रोबेड्स दिखाई नहीं देते. विदेशों में तो इनपर काफी स्टडी की गई है लेकिन भारत में अपने तरह की यह पहली स्टडी है.

रिसर्च में हुए ये खुलासे.
रिसर्च फर्म टॉक्सिक लिंक के एसोसिएट डायरेक्टर ने बताया कि रिसर्च के दौरान कई अलग-अलग ब्रांड्स के फेस वॉश, स्क्रब, लोशन जैसे कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स की टेस्टिंग की गई. टेस्टिंग में 50 फीसदी फेस वॉश, 67 फीसदी स्क्रब में माइक्रोप्लास्टिक मिले. दरअसल, माइक्रोबेड्स ही माइक्रोप्लास्टिक के रूप में पाए जाते हैं. ये माइक्रोप्लास्टिक के पार्टिकल्स इतने छोटे होते हैं कि वो दिखाई नहीं देते.

लेकिन हमारी त्वचा और फूड चेन में जाकर बहुत हानि पहुंचाते हैं. उन्होंने कहा कि स्टडी सामने आने के बाद भी इस मुद्दे पर अभी तक ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी की तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया गया है. 

आपको ऐसे नुकसान पहुंचा रहे हैं माइक्रोबेड्स.
ब्यूटी प्रोडक्ट्स की सेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए कुछ केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है. ये केमिकल्स डार्क स्पॉट्स और एंटी एजिंग में मदद करते हैं. लेकिन, फेस वॉश से मुंह धोते समय ये कण आखों में चले जाते हैं और कॉर्निया को नुकसान पहुंचाते हैं. इतना ही नहीं ऐसे कण पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं. विदेशी ब्यूटी कंपनियों ने इसके विकल्प तैयार कर लिए हैं. ये कंपनियां बीवैक्स, जोजोबा वैक्स जैसे कई तरह के नेचुरल चीजों से ब्यूटी प्रोडक्ट्स बना रही हैं, लेकिन इंडियन कंपनियों ने अब तक ऐसा कोई रास्ता नहीं निकाला है.

क्या कहते हैं ब्यूटी एक्सप्रर्ट.
ब्यूटी एक्सपर्ट भारती तनेजा ने कहा कि ब्यूटी प्रोडक्ट्स की क्वालिटी काफी तेजी से गिरी है. मैं खुद ब्यूटी प्रोडक्ट्स बनाती हूं लेकिन हमेशा यह ध्यान रखती हूं कि मेरे प्रोडक्ट्स नेचुरल चीजों से ज्यादा बनें. उनमें हर्बल कंटेंट ज्यादा हो. कई बार कस्टमर सस्ता प्रोडक्ट खरीदने के चक्कर में हानिकारक चीजें घर ले आते हैं.

भारत में नहीं है कोई रेगुलेशन.
माइक्रोप्लास्टिक के नुकसान को देखते हुए विदेशों में इसपर बैन लगा दिया गया है. साल 2017 में अमेरिका में जिन कॉस्मेटिक उत्पादों में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा पाई गई थी उसे बैन कर दिया गया है. यूके और कनाडा में साल 2018 में इन उत्पादों पर बैन लगा दिया गया है. लेकिन भारत अब तक इस मामले में बहुत पीछे है. यही नहीं भारत में पानी की बोतलों में भी माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए हैं लेकिन इसपर कोई नियम लागू नहीं हुए.