जयपुर:भाजपा के गढ़ के तौर पर पहचान रखने वाले जयपुर शहर की आठ सीटों पर इस बार मुकाबला रोचक हो गया है। आठ में से दो सीटें त्रिकोणीय संघर्ष में फंसी है, तो बाकी छह पर भाजपा की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है। भाजपा के तीन दिग्गज अशोक परनामी, कालीचरण सराफ व अरुण चतुर्वेदी को कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिल रही है। ऐसे में क्या भाजपा अपने गढ़ को बचा पाएगी या फिर कांग्रेस इसमें सेंध लगा देगी ।

राजधानी में रोचक हुआ मुकाबला
आठ सीटों पर भाजपा की प्रतिष्ठा लगी दाव पर
सभी आठ सीटों पर है अभी भाजपा के विधायक
लेकिन इस बार कांग्रेस दे रही कड़ी चुनौती
दो सीट त्रिकोणीय संघर्ष में फंसी हुई है

राजधानी जयपुर को भाजपा का गढ़ माना जाता है, लेकिन यह शहर उलटफेर के लिए भी प्रसिद्ध है। इस बार शहर की आठ में से छह सीटों पर भाजपा व कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है, लेकिन निर्दलीय ने यहां पर मुकाबले रोचक बना रखे हैं। ये सीट हैं मालवीय नगर, आद्रश नगर, सिविल लाइन्स, हवामहल, बगरु व किशनपोल। वहीं सांगानेर व विद्याधर नगर में इस बार त्रिकोणीय संघर्ष हो रहा है। 

सांगानेर में तिवाड़ी को युवाओं से चुनौती
भाजपा से मेयर अशोक लाहोटी है उम्मीदवार
कांग्रेस ने युवा पुष्पेंद्र भारद्वाज को उतारा मैदान में
भारत वाहिनी से घनश्याम तिवाड़ी है उम्मीदवार
अब तक तिवाड़ी जीतते रहे हैं भाजपा की टिकट पर
भाजपा के वोटे बैंक में सेंध लगा रहे हैं तिवाड़ी
तिवाड़ी के ब्राह्मण वोट में पुष्पेंद्र लगा रहे सेंध
त्रिकोणीय बन गया है सांगानेर का संग्राम

301599 मतदाताओं में से सांगानेर में सबसे अधिक 52000 ब्राह्मण हैं, 18000 वैश्य, 5000 जैन, 18000 माली, 30000 एससी, 29000 ओबीसी, इनके अलावा 20000 हिंदी और पंजाबी वोटर्स हैं। घनश्याम तिवाड़ी ब्राह्मण समुदाय से आते हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी ने भी पुष्पेंद्र भारद्वाज के रूप में ब्राह्मण समाज कार्य उम्मीदवार मैदान में उतारा है। ऐसे में 52000 वोटों में से आधे आधे मतदाता भी दोनों में बंटते हैं, तो एससी और ओबीसी के साथ ही सिंधी पंजाबी और वैश्य निर्णायक भूमिका में होंगे। वैश्य समाज से भाजपा ने उम्मीदवार उतारा है।

विद्याधर नगर में बागी ने बनाया रोचक मुकाबला
भाजपा से नरपत राजवी है मैदान में
कांग्रेस ने सीताराम अग्रवाल को उतारा इस बार
निर्दलीय विक्रम सिंह ने बनाया मुकाबला त्रिकोणीय
विक्रम सिंह ने भाजपा व कांग्रेस के समीकरण बिगाड़े
राजवी के राजपूत वोट में लगा सकते हैं सेंध
दोनों के बीच हो सकता है राजपूत वोट बैंक का बंटवारा

सांगानेर व विद्याधर नगर के अलावा राजधानी की छह सीटों पर कांग्रेस व भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है, लेकिन वोट काटू निर्दलीय के कारण दोनों सियासी दलों के उम्मीदवार परेशानी में है। छह में से तीन सीटों आदर्श नगर, मालवीय नगर व सिविल लाइन्स पर भाजपा के दिग्गजों की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हुई है। आदर्शनगर से भाजपा विधायक अशोक परनामी का कांग्रेस के नए चेहरे रफीक खान से सीधा मुकाबला हैं। परनामी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और लगातार दो बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं। पिछले चुनाव में परनामी ने कांग्रेस के माहिर आजाद को 3803 मतों से हराया था। लगातार दो बार विधायक रहने के कारण क्षेत्र में एंटीइनमबेंसी है और कुछ समाज खुलेआम नाराजगी भी दिखा चुके हैं। वहीं कांग्रेस के नए उम्मीदवार को इस बार सत्ता विरोधी लहर का फायदा मिल सकता हैं। आदर्शनगर से इस बार अन्य दलो एवं निर्दलीय सहित कुल 31 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। चुनाव में ज्यादा उम्मीदवार होने से भी प्रमुख दलों के प्रत्याशियों को नुकसान उठाना पड़ सकता हैं। 240476 मतदाताओं वाली सीट पर 93000 मुस्लिम है, 52000 वैश्य। इनके अलावा 18000 ब्राह्मण, 23000 एससी एसटी और 10000 जैन मतदाता निर्णायक भूमिका में होते हैं।  वैसे परनामी वोटों के ध्रुवीकरण की आस में जीत की गणित लगाए बैठे हैं।

मालवीय नगर से चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ का मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी अर्चना शर्मा से हैं। सराफ कई बार विवादों में रहे थे और इस बार उनकी टिकट पर भी संकट आ गया था, लेकिन सीएम राजे ने आखिरकार कालीचरण को टिकट दिलवा ही दी। वहीं अर्चना शर्मा लगातार दूसरी बार इस सीट से मैदान पर है।

इस क्षेत्र में करीब कुल मतदाता दो लाख 16 हजार है। जिसमें तकरीबन ब्राह्मण 50 हजार, वैश्य 40 हजार, एससी को 30 हजार, माली 25 हजार, कुमावत दस हजार, मुस्लिम 28 हजार, कायस्थ सात हजार तथा पांच हजार राजपूत हैं। इस लिहाज से यह तय माना जा रहा है कि यहां सवर्ण जातियों और व्यापारियों का खासा प्रभाव है और ये दोनों जातियां ही हार जीत तय करेगी।

तीसरी हॉट सीट हैं सिविल लाइन्स। यहां पर राजे सरकार के मंत्री अरुण चतुर्वेदी को कांग्रेस के शहर अध्यक्ष प्रताप सिंह खाचरियावास टक्कर दे रहे हैं। आरएसएस के लोग जहां मालवीय नगर में कालीचरण से खफा नजर आ रहे हैं, वहीं सिविल लाइन्स में उन्होंने चतुर्वेदी के प्रचार की कमान संभाल रखी है।  यहां पर सबसे ज्यादा 75000 ओबीसी हैं, जिनमें 35,000 माली वोटर हैं, इसके अलावा 45000 ब्राह्मण, 20000 क्षत्रिय, 45000 वैश्य और 35000 मुस्लिम मतदाता हैं। प्रताप सिंह व चतुर्वेदी दोनों ही एक एक बार यहां से विधायक रह चुके हैं।

शहर की हवामहल सीट पर भाजपा के मौजूदा विधायक सुरेन्द्र पारीक और कांग्रेस उम्मीदवार पूर्व सांसद महेश जोशी के बीच सीधा मुकाबला हैं। पारीक यहां से वर्ष 2003 में भी विधायक चुने गए थे। उन्होंने पिछला चुनाव तत्कालीन मंत्री बृजकिशोर शर्मा को 12 हजार 715 मतों से हराया था। वहीं महेश जोशी सांसद रह चुके हैं। जोशी की सांसद के तौर पर जीत अप्रत्याशित मानी गई थी। अल्पसंख्यक वोट इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाएंगे। हवामहल से भाजपा पांच बार चुनाव जीत चुकी हैं जबकि कांग्रेस ने दो बार, दो बार जनता पार्टी, एक बार जनसंघ, स्वतंत्र पार्टी, एवं निर्दलीय ने चुनाव जीता हैं। हवा महल सीट पर सबसे ज्यादा वोटर 60000 ब्राह्मण हैं। 25000 वैश्य, 80000 अल्पसंख्यक हैं, 25000 माली, 15000 सिंधी हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस बार पूर्व सांसद महेश जोशी को टिकट दिया है तो भारतीय जनता पार्टी की तरफ से लगातार दूसरी बार सुरेंद्र पारीक उम्मीदवार हैं।

किशनपोल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी विधायक मोहन लाल गुप्ता को फिर चुनाव मैदान में उतारा हैं, जबकि कांग्रेस ने अमीन कागजी को फिर से मौका दिया गया हैं। कागजी पिछली बार चुनाव हार गय थे। गुप्ता वर्ष 2003 से भाजपा विधायक हैं। इस बार किशनपोल से अन्य दलों एवं निर्दलीय सहित कुल 46 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं जो राज्य में अन्य सीटों के मुकाबले सर्वाधिक हैं।  किशनपोल सीट पर 65,000 मुस्लिम है, लेकिन 35000 ब्राह्मण व 45000 वैश्य भी है। यहां से जमींदारा पार्टी की चारू गुप्ता व निर्दलीय भारत शर्मा मोहनलाल की जीत की गणित बिगाड़ रहे हैं। उधर अमीन कागजी अपने पिता सलीम कागजी की साफ छवि को भुनाने की कोशिश में है। बगरु से भाजपा उम्मीदवार मौजूदा विधायक कैलाश वर्मा और कांगेस ने पूर्व विधायक गंगा देवी को चुनाव मैदान में उतारा हैं और दोनों में सीधा मुकाबला होने की संभावना हैं।   लेकिन इस बार एक दर्जन से ज्यादा गांव में माहौल उनके लिए बेहद प्रतिकूल है। इस विधानसभा क्षेत्र में करीब एक लाख एससी-एसटी वोटर हैं, जबकि 30000 वैश्य, 30000 जाट, 40000 मुस्लिम, 10000 कुमावत और इसके अलावा 50000 ओबीसी मतदाता हैं। बेनीवाल की बोतल वाली पार्टी दोनों ही दलों को नुकसान पहुंचा सकती है, क्योंकि जाट करीब 30 हजार है, लेकिन फिलहाल उनके उम्मीदवार जीत की स्थिति में नहीं हैं।