कठुआ गैंगरेप मामले ने हिंदू-मुस्लिम रंग ले लिया है. इसे तूल देने से बचने के लिए जम्मू कश्मीर सरकार ने दो सिख चीफ प्रॉस्क्यूटिंग ऑफिसर भूपिंदर सिंह और हरमिंदर सिंह को नियुक्त करने का फैसला किया है.

इस बारे कानून विभाग के सेक्रेटरी अब्दुल मजीद भट ने कहा कि, " कठुआ गैंगरेप मामले को लेकर दो समुदाय आमने-सामने हैं. दोनों ही एक दूसरे पर भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं. इसलिए जम्मू कश्मीर सरकार ने इस मामले की आगे की जांच के लिए दो सिख अफसरों की नियुक्ति की है, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो."

आपको बता दें कि कठुआ गैंगरेप और मर्डर केस में दाखिल आरोपपत्र से इस बात का खुलासा हुआ है कि बकरवाल समुदाय की बच्ची का अपहरण, गैंगरेप और हत्या इलाके से इस अल्पसंख्यक समुदाय को हटाने की एक सोची समझी साजिश का हिस्सा थी. इसमें कठुआ स्थित रासना गांव में देवीस्थान मंदिर के सेवादार सांझी राम समेत 7 लोगों को आरोपी बताया गया.

इस घटना के मास्टरमाइंड सांझी राम को फिलहाल पुलिस ने अरेस्ट किया है. उसके साथ कुल आठ लोग और भी गिरफ्तार किए गए हैं. हैरान करने वाली बात तो यह कि इनमें से कुछ आरोपी हिंदू एकता मंच से भी जुड़े हैं.

हिंदू संगठनों का आरोप है कि अल्पसंख्यक डोगरा समुदाय को फंसाया जा रहा है. इसी के चलते जम्मू हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने जम्मू बंद रखा था. यह लोग मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग कर रहे हैं. यही नहीं, राज्य सरकार में भाजपाई मंत्री लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा भी सीबीआई जांच का समर्थन कर रहे हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि नोमाद बकरवाल और डोगरा समुदाय के बीच इस इलाके में वर्चस्व को लेकर पहले तो कोई विवाद नहीं होता था, लेकिन पिछले 3-4 सालों में दोनों समुदायों के बीच तनाव बढ़ा है.

बता दें कि आठ साल की आसिफा नोमाद बकरवाल समुदाय से आती है. वह घोड़े चराने जंगल गई थी तभी से वह लापता थी. फिर 17 जनवरी को उसका शव मिला था.