जयपुर/फागी. नकली पनीर, मावा और घी के बाद अब अमूल दूध में मिलावट करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। यह गिरोह डेयरी में दूध लेकर जाने वाले टैंकर चालकाें से मिलीभगत कर हर दिन दाे से तीन हजार लीटर दूध टैंकर से चोरी करते और इसके बदले इतना ही कैमिकल से बनाया गया नकली दूध इसमें डाल देते थे। यह हर दिन अलग-अलग जगह पर इस काले कारनामे का अंजाम देते थे।

रविवार काे पुलिस ने रेनवाल मांजी पुलिस चाैकी के पास एक ढाबे के पीछे टैंकर से शुद्ध दूध निकालकर नकली दूध मिला रहे टैंकर चालक व दाे अन्य आराेपियाें काे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने 24 हजार लीटर दूध से भरा टैंकर, दूध के दाे ड्रम, जनरेटर व टैंकर की सील ताेड़ने के उपकरण बरामद किए हैं।

टैंकर चालक मानसिंह रैबारी बूंदी में इंद्रगढ़ का रहने वाला है। दूसरा आराेपी राज फागी इलाके में श्रीराजपुरा व तीसरा धर्मराज गुर्जर बूंदी में डेई खेड़ा इलाके में लक्ष्मीपुरा का रहने वाला है।

ढाबाें के किनारे रुककर करते थे मिलावट, सील तोड़कर फेविक्विक से चिपकाते

एसपी जयपुर (ग्रामीण) शंकर दत्त शर्मा ने बताया कि टैंकर में मालपुरा स्थित स्टाेरेज से 24 हजार लीटर दूध भरकर मानेसर के लिए भेजा गया था। दाेनाें बदमाश जयपुर से ही टैंकर के साथ-साथ चलने लगे। रेनवाल के पास सुनसान जगह देखकर ढाबे के पीछे टैंकर ले जाकर दूध निकालने लगे। आराेपी विशेष उपकरण से टैंकर की सील खाेलते। नकली दूध मिलाने के बाद सील काे फेविक्विक से चिकपा देते। ताकि मानेसर में इसका पता न चले। पुलिस अब मानेसर के कर्मचारियों से भी पूछताछ करेगी।

काले कारनामे में टैंकर चालक व प्लांट कर्मचारी भी मिले हुए
 

चालक : 35% कमीशन लेता था, शुद्ध दूध को बाजार में बेच देता
आराेपियाें ने बताया कि जितना दूध निकालते उसकी कीमत का करीब 30 से 35% कमीशन चालक काे देते थे। दूध काे बाजार में सप्लाई कर देते थे। दूध असली हाेने के कारण आसानी से बिक जाता था। पूछताछ में आराेपियाें ने बताया कि दूध की एडवांस बुकिंग तक रहती थी।

प्लांट कर्मचारी : खुली सील और टैंकर रुकने पर भी पूछताछ नहीं
पुलिस टीम काे मानेसर प्लांट के कर्मचारियाें की मिलीभगत भी इस खेल में दिख रही है। क्योंकि टैंकर में जीपीएस सिस्टम लगा है। टैंकर एक-दो घंटे मिलावट के लिए रुकता, इसके बाद भी  चालक से पूछताछ नहीं की जाती थी। खुली हुई सील काे भी नजरअंदाज क्यों किया गया?