अजमेर. राजस्थान (Rajasthan) के अजमेर जिले का देवमाली गांव (Devmali Village) कलयुग में सतयुग का अहसास कराता है. इस गांव में किसी भी मकान की छत पक्की नहीं है. 100 फीसदी शुद्ध शाकाहारी (Pure vegetarian) लोगों के इस गांव में आज तक चोरी (Theft) नहीं हुई. गांव में केरोसिन के जलाने पर रोक है. नीम के पेड़ (Neem tree) का बहुत सम्मान होता है. सभी ग्रामीण सुबह सुबह गांव की पूरी पहाड़ी के चारों तरफ नंगे पैर परिक्रमा करते हैं. इस पहाड़ी पर भगवान देवनारायण (Devnarayan) का मंदिर है. ग्रामीणों की भगवान देवनारायण में यहां के लोगों की गहरी आस्था (Faith) है.

परंपराओं का पालन करते हैं लोग
किवदंती है कि देवनारायण जब इस गांव में आये तो ग्रामीणों की सेवा भावना से बहुत खुश हुए. उन्होंने ग्रामीणों से वरदान मांगने को कहा तो गांव वालों ने कुछ नहीं मांगा. बताया जाता है कि इस पर देवनारायण जाते-जाते कह गए सुकून से रहना है तो पक्की छत का मकान मत बनाना. गांव वाले इसका आज भी पालन करते हैं. सदियां गुजर गई, लेकिन देवमाली गांव में पक्की छत का एक भी मकान नहीं बना.
शराब, मांस और अंडे को छूते तक नहीं हैं

ग्रामीणों के मुताबिक कई लोगों ने पक्की छत डालने की कोशिश की तो उसका कोई न कोई खामियाजा उनको उठाना पड़ा. तभी से अनहोनी की आशंका में चलते ग्रामीण पक्की छत नहीं बनाते. कच्चे,घास फूस और केलू से बने आशियाने ही देवमाली की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं. सीमेंट-चूने का इस्तेमाल भी ग्रामीण नहीं करते. शराब, मांस और अंडे को छूते तक नहीं हैं ग्रामीण.

भोपाओं को सिद्धि हासिल बताई जाती
गांव की बी-टेक उतीर्ण छात्रा मीरा बताती है एक दो बार किसी ने इन परम्पराओं को तोड़ने के प्रयास किये, लेकिन उसका भी खामियाजा उनको भुगतना पड़ा. देवनारायण के साधक भोपाओं को सिद्धि हासिल बताई जाती है. वो झाड़ फूंक से असाध्य रोगों का इलाज करने का दावा करते हैं. यहां के बिला बिल्ली तालाब में नहाने वालों के चर्म और एलर्जी ठीक होने का भी दावा किया जाता है. 

आज तक कभी चोरी नहीं हुई
गांव के बुजुर्ग भगवान गुर्जर बताते हैं इस गांव में आज तक कभी चोरी नहीं हुई. एक बार चोर पहाड़ी पर बने मन्दिर में घुस गए. दान पात्र में रखे पैसे भी चुरा लिए, लेकिन आगे नहीं जा सके. बाद में चोरों को ग्रामीणों ने पकड़ लिया. गांव की पहाड़ी के तमाम पत्थर झुके हुए हैं. मीरा गुर्जर बताती है यहां की पहाड़ी से कोई पत्थर नहीं ले जाता. यहां के बगड़ावत भोपा गुर्जर देवनारायण की आराधना में कई दिन और कई रात बिना थके-हारे भजन गाते हैं.

बगड़ावतों की कहानी सुनने हजारों लोग जुटते हैं
अनपढ़ होने के बावजूद भोपाओं की यादाश्त यहां सबको चौंकाती है. इनके मुंह से बगड़ावतों की कहानी सुनने हजारों लोग जुटते हैं. पूरा गांव सुबह सुबह पूरी पहाड़ी के चारों तरफ नंगे पैर परिक्रमा करता है. लोग देवनारायण से कुछ नहीं मांगते. बस शांत और समृद्धि की कामना करते हैं. 1500 की आबादी वाले इस गांव में गुर्जर जाति की सिर्फ लावड़ा गोत्र के लोग ही बसते हैं, जो देवनारायण के साथ प्रकृति की इबादत करते हैं.

पशुपालन के जरिये ही यहां जिंदगी चहकती है
बिना पक्की छत के भी यह गांव गुलजार है. गांव का स्कूल और धर्मशाला पक्की बनी हुई है. एक भी इंच जमीन ग्रामीणों के पास नहीं है. गांव की सारी जमीन भगवान देवनारायण के पास है. ये जमीन ग्रामीणों के नाम नहीं हो सकती. पशुपालन के जरिये ही यहां जिंदगी चहकती है. इसे आस्था कहें या अन्धविश्वास. लेकिन गांव वालों की इस श्रद्धा से हर कोई हैरान है. पूरे देश के श्रद्धालु इस गांव में दर्शन करने आते हैं.