नई दिल्ली: वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा कि राफेल शानदार विमान है और यह गेमचेंजर साबित होगा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (एचएएल) के डील का हिस्सा नहीं बन पाने पर धनोआ ने कहा कि एचएएल को पहले भी कॉन्ट्रैक्ट मिल चुके हैं, लेकिन तब डिलीवरी में देरी हुई थी। उन्होंने रूस के साथ संभावित एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम समझौते को भी वायुसेना की ताकत बढ़ाने वाला बताया।

ऑफसेट पार्टनर दैसो ने चुना था- धनोआ
धनोआ ने बुधवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मौजूद समय में एयरक्राफ्ट स्क्वॉड्रन की घटती संख्या वायुसेना के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में उप-महाद्वीप में राफेल जैसा अच्छा विमान नतीजे हमारे लिए बदलने वाला साबित होगा।

रिलायंस डिफेंस को ऑफसेट पार्टनर चुने जाने पर चल रहे विवाद के बारे में धनोआ ने कहा- ऑफसेट पार्टनर दैसो ने चुना था। इसमें सरकार या वायुसेना की कोई भूमिका नहीं है। राफेल समझौते में हमें अच्छा पैकेज मिला है और इससे हमें काफी फायदा होगा। 

उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड को पहले भी कॉन्ट्रैक्ट दिए गए। लेकिन, इसमें देरी हुई और नुकसान हुआ। सुखोई-30 में 3 साल, जगुआर में 6 साल, मिराज 2000 की डिलीवरी में 2 साल की देरी हुई। 

'चीन को जवाब देने के लिए योजना'
तिब्बत में चीन इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर वायुसेना प्रमुख ने कहा- हम चीन पर नजर रख रहे हैं। चीन कह रहा है कि एयरपोर्ट का निर्माण क्षेत्रीय संपर्क के लिए किया जा रहा है। हमारे पास इसका जवाब देने की योजना है। हम भी अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहे हैं। तिब्बत में चीन के 50 एयरक्राफ्ट परेशानी की बात नहीं हैं।