नई दिल्ली:चीन के बेल्ट ऐंड रोड फोरम की बैठक के न्योते को भारत ने ठुकरा दिया है वहीं इसके पड़ोसी देशों मालदीव,श्रीलंका,नेपाल और बांग्लादेश ने शामिल होने की पुष्टि कर दी है। जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में 40 देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकारों के शामिल होने की संभावना है। 

सूत्रों से मिली सूचना के मुताबिक, भूटान बीआरआई फोरम बैठक में संभवतः शामिल नहीं होगा। चीन ने पिछले 12 महीनों में भूटान की नई सरकार के साथ अपनी बातचीत में तेजी लाई है ताकि यह थिंपू को भारत के प्रभाव से दूर कर सके। भूटान के चीन के साथ कोई कूटनीतिक संबंध नहीं हैं हालांकि वह अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए चीन को संभावित साझीदार के रूप में देख रहा है। इसे पता है कि फोरम में उसकी मौजूदगी भारत द्वारा संभवतः स्वीकार नहीं की जाएगी।

बतादें, भूटान चीन के साथ द्विपक्षीय बातचीत को लेकर सतर्क रहा है। वहीं, कॉन्ग के दौरे के बाद जारी प्रेस वार्ता में थिंपू द्वारा सिर्फ यह कहा गया था कि उनकी दो दिन की यात्रा में पारस्परिक हितों पर बातचीत हुई। चीन ने अपने बयान में कहा था कि वह भूटान की आजादी, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है। चीन के विदेश मंत्री ने एक बयान में कहा था, 'चीन भूटान के बेल्ट ऐंड रोड पहल में सक्रिय भागीदारी और चीन के विकास के लाभ को साझा करने का स्वागत करता है।'

गौरतलब है कि भूटान ने 2017 में फोरम की पहली बैठक का बहिष्कार किया था और भारत के साथ खड़ा हुआ था। इस बार भी 2017 की तरह भूटान एकमात्र पड़ोसी देश है जो इस बैठक में शामिल किए जाने की चीन की कोशिश का विरोध कर रहा है। भारत बीआरआई को अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है क्योंकि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पाक अधिकृत गिलगित-बाल्टीस्तान से होकर गुजरता है। हाल के समय में चीन भूटान को लुभाने की कोशिश कर रहा है क्योंकि भारत में चीनी राजदूत नियमित रूप से थिंपू का दौरा कर रहे हैं। चीन के उप विदेश मंत्री कॉन्ग ने भी पिछले साल भूटान का दौरा किया था।