अधिकमास 2020 (Adhikmas 2020): अधिकमास (Adhikmas) आज से शुरू हो गया है. अधिकमास (Adhikmas)को मल मास (Malmas) या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. अधिकमास तीन साल में एक बार आता है. अधिकमास में मांगलिक कार्य जैसे शादी, विवाह, घर निर्माण या नए वस्त्रों की खरीददारी करने से परहेज करना चाहिए. लेकिन अधिकमास में पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने से इसका फल कई गुना बढ़कर मिलता है. अधिकमास भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. भगवान विष्णु को अधिकमास का स्वामी माना जाता है. आइए जानते हैं अधिकमास की प्राचीन कथा...
अधिकमास की प्राचीन कथा...
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि-मुनियों ने ज्योतिष की गणना पद्धति से हर चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किए. हालांकि अधिकमास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ, तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार नहीं हुए. ऐसे में स्वामीविहीन होने के कारण अधिकमास को 'मलमास' कहने से उसकी बड़ी निंदा होने लगी. इस बात से दु:खी होकर मलमास श्रीहरि विष्णु के पास गया और उनसे दुखड़ा रोया.

भक्तवत्सल श्रीहरि उसे लेकर गोलोक पहुचे. वहां श्रीकृष्ण विराजमान थे. करुणासिंधु भगवान श्रीकृष्ण ने मलमास की व्यथा जानकर उसे वरदान दिया- अब से मैं तुम्हारा स्वामी हूं. इससे मेरे सभी दिव्य गुण तुम में समाविष्ट हो जाएंगे. मैं पुरुषोत्तम के नाम से विख्यात हूं और मैं तुम्हें अपना यही नाम दे रहा हूं. आज से तुम मलमास के बजाय पुरुषोत्तम मास के नाम से जाने जाओगे.

इसीलिए प्रति तीसरे वर्ष (संवत्सर) में तुम्हारे आगमन पर जो व्यक्ति श्रद्धा-भक्ति के साथ कुछ अच्छे कार्य करेगा, उसे कई गुना पुण्य मिलेगा. इस प्रकार भगवान ने अनुपयोगी हो चुके अधिकमास को धर्म और कर्म के लिए उपयोगी बना दिया. अत: इस दुर्लभ पुरुषोत्तम मास में स्नान, पूजन, अनुष्ठान एवं दान करने वाले को कई पुण्य फल की प्राति होगी.

अधिकमास नाम इसलिए पड़ा:
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है. अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घंटे के अंतर से आता है. इसका आगमन सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है. भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है. दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है. इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिकमास का नाम दिया गया है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. http://newsflashrajasthan.com इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)