नई दिल्ली:लोकसभा चुनाव के लिए हरियाणा में ‘आप’ और ‘जननायक जनता पार्टी’ (जजपा) के बीच शुक्रवार को गठबंधन होने के बाद दिल्ली में गठबंधन को लेकर कांग्रेस के रुख में नरमी को देखते हुए आप ने भी साफ कर दिया है कि उसके दरवाजे भी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं. 

आप सूत्रों की मानें तो पार्टी दिल्ली की सात सीटों पर कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के मुद्दे पर बातचीत तो कर सकती है लेकिन अब सीट बटवारे का फार्मूला बदलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता . 

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि अगर कांग्रेस दिल्ली में गठबंधन के लिए बातचीत करती है तो उसके समक्ष चार-तीन के बजाय पांच-दो के फार्मूले पर बात करने की पेशकश की जा सकती है. 

चाको ने कहा सिर्फ दिल्ली गठबंधन के इच्छुक है कांग्रेस
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी पीसी चाको ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि पार्टी सिर्फ दिल्ली में आप के साथ गठबंधन कर सकती है. चाको ने कहा कि अगर आप दिल्ली में गठबंधन की इच्छुक है तो बातचीत के दरवाजे अभी भी खुले हैं. 

 

आप नेतृत्व कांग्रेस के साथ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, गोवा और चंडीगढ़ की 33 सीटों पर गठबंधन कर चुनाव लड़ने की पेशकश कर रही है. चाको के बयान के बाद और जजपा के साथ गठबंधन के घोषित होने के मद्देनजर आप ने भी अब हरियाणा को गठबंधन के फार्मूले से बाहर कर दिया है. 

दिल्ली में गठबंधन का फार्मूला बदल सकता है
सूत्रों ने बताया कि अब बदली हुई परिस्थितियों में दिल्ली के गठबंधन का फार्मूला भी बदलेगा. पार्टी की दलील है कि हरियाणा और पंजाब में गठबंधन की स्थिति में आप ने कांग्रेस को दिल्ली में तीन सीट देने की पेशकश की थी. लेकिन अब, सिर्फ दिल्ली की बात होने पर आप कांग्रेस गठबंधन का फार्मूला पांच: दो में तब्दील हो सकता है.

चाको के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिल्ली के प्रभारी गोपाल राय ने भी दिल्ली में गठबंधन की संभावनाओं को खारिज नहीं किया. कांग्रेस द्वारा आप को अभी भी दिल्ली में तीन सीट देने के प्रस्ताव के सवाल पर राय ने कहा, “सवाल 33 या तीन सीट का नहीं है, अकेले दिल्ली से देश नहीं बचेगा. ऐसे में सवाल देश के लिए ख़तरा बन चुकी भाजपा को हराने का है.” उन्होंने कहा कि आप का कैडर (कार्यकर्ता) गठबंधन का विरोध कर रहा है लेकिन देशहित को ऊपर रखकर पार्टी ने गठबंधन की पहल की थी.