नई दिल्ली:वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों को त्योहार का तोहफा मिल सकता है।उम्मीद की जा रही है कि मोदी सरकार केंद्रीय कर्मचारीयो की विदेश यात्रा का विकल्प खोल सकती है।सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार केंद्रीय कर्मचारियों को एलटीसी के तहत विदेश जाने का विकल्प देगी। लंबे विचार के बाद इस प्रस्ताव को सरकार ने मान लिया है।सरकार के इस कदम को आम चुनाव से केद्रीय कर्मचारियो को रिझाने की कोशिश के रूप में माना जा रहा है। हालांकि केंद्रीय कर्मचारी कौन-कौन से देश जा सकते है।यह सरकार तय करेगी।शुरुआत में दस देशों में घूमने की अनुमति दी जा सकती है।यह सुविधा कब से और किन देशों के लिए मिलेगी, यह पीएम मोदी के निर्देश के बाद तय किया जाएगा।

दूसरे देशों से मजबूत होंगे संबंध
सूत्रों के मुताबिक विदेश मंत्रालय और डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ऐंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) ने संयुक्त रूप से मिलकर प्रस्ताव को तैयार किया था।विदेश मंत्रालय के अनुसार यह सुविधा मिलने से जिन देशों में कर्मचारी अपने परिवार के साथ जाएंगे। वहां के संबंध भारत से मजबूत होंगे।आपको बता दें अभी LTC में 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को घूमने के लिए छुट्टी और ब्याज रहित एडवांस देने का प्रावधान है।अभी देश में ही घूमने की छूट मिलती थी।

नहीं मिलेगा रोजाना भत्ता
केंद्रीय कर्मचारियों को अब एलटीसी के तहत रोजाना भत्ता नहीं मिलेगा. एलटीसी के तहत कर्मचारियों को टिकट के पैसे वापस मिलते हैं।डीओपीटी ने इस बारे में एक बार फिर कहा है कि स्थानीय यात्राओं पर आए खर्च और किसी इमरजेंसी खर्च को एलटीसी के तहत स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि प्रीमियम या सुविधा ट्रेनों और तत्काल जैसी सेवाओं को एलटीसी के तहत अनुमति दी गई है।

LTC में मिलेगी इन देशों की यात्रा
विदेश मामलों के मंत्रालय (एमईए) ने प्रस्तावित योजना में एलटीसी योजना के तहत एशियाई देशों- कज़ाखस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज़्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान को शामिल करने का प्रस्ताव रखा है।हालांकि इसके अलावा भी 5 देशों की यात्रा में छूट दी जा सकती है।लेकिन यह सरकार तय करेगी।

क्या है सरकार का लक्ष्य
अधिकारियों ने बताया कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मध्य एशियाई क्षेत्र में भारत के पदचिह्न को बढ़ाने ही इस कदम का लक्ष्य है।इससे पहले मार्च में सरकार ने कहा था कि उसने एलटीसी को अपने कर्मचारियों को सार्क देशों की यात्रा करने की अनुमति देने के प्रस्ताव को स्थगित कर दिया है। आपको बता दें क्षेत्रीय सहयोग के लिए दक्षिण एशियाई संघ (सार्क) अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका समेत आठ राष्ट्रों का एक समूह है।