जयपुर:प्रदेश में 28 साल पहले जिस तरह से जनता दल 200 में से 55 विधानसभा सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रही थी। ठीक वैसी ही बयार इस बार दिखेगी या नहीं ये भविष्य तय करेगा लेकिन प्रदेश में पहला मौका है जब थर्ड फ्रंट के नाम से चार पार्टियां एकजुट हुई है। तीसरे मोर्चे को मजबूत करने के लिए अन्य राजनीतिक दल मोर्चे के प्रमुख नेताओं के संपर्क में हैं। प्रदेश में 28 साल पहले जनता ने तीसरा विकल्प खड़ा किया था।

तब में और अब में ज्यादा फर्क नहीं
उस समय भी किसानों के मुद्दे प्रदेश में छाए हुए थे। प्रदेश की जनता बीजेपी -कांग्रेस के अलावा नई पार्टी प्रदेश में खड़ा रखना चाहती थी ताकि समय के साथ बडे़ और अच्छे बदलाव विकास के लिए मददगार बने। उस समय बीजेपी 85 सीट जीतकर नंबर वन, जनता दल 55 सीटों के साथ नंबर-2 पर थी और कांग्रेस 50 सीटों पर ही जीत दर्ज करके नंबर तीन पर चली गई थी।

जनता अब तक हराती आई है, पहली बार जीतना होगा
राजस्थान की जनता हर विधानसभा चुनाव में बीजेपी-कांग्रेस की सरकार बदलती है। यानी की प्रदेश की जनता किसी पार्टी को जीताने के लिए नहीं बल्कि हराने पर अधिक फोकस होकर मतदान करती है। दिल्ली में भी ये ही सब चल रहा था। दिल्ली की जनता ने बदलाव किया है। उम्मीद है राजस्थान की जनता भी बदलाव करेगी। -अरविंद केजरीवाल, आप संयोजक व सीएम दिल्ली
फाइट में आ चुका है तीसरा मोर्चा
राजस्थान में तीसरा मोर्चा फाइट में आ चुका है। जो 28 साल पहले हुआ था उससे बेहतर परिणाम प्रदेश में आने वाले हैं। जनता बदलाव चाहती है और तीसरा मोर्चा ही विकल्प प्रदेश को देने जा रहा हैं। सवा सौ सीटों पर हम नेट-टू-नेट फाइट में दिखेंगे। ये किसान का और 36 कौम का चुनाव है। फैसला जनता को जनता के हक में करना है। - हनुमान बेनीवाल, विधायक और तीसरे माेर्चे के प्रमुख

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन, कांग्रेस को भी सफलता के आसार नहीं
बीजेपी-कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने राजस्थान की जनता के साथ धोखा ही किया है। इनकी हकीकत जनता को पता चल चुकी है। दावे के साथ कह सकता हूं कि राजस्थान में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इसी बदलाव के लिए भारत वाहिनी काम कर रही है और शुभ संकेत हैं कि हमारी पाार्टी से समाज का श्रेष्ठी वर्ग लगातार जुड़ रहा है। घनश्याम तिवाड़ी, प्रदेशाध्यक्ष भारत वाहिनी

हम ही विकल्प साबित कर चुके है
बीजेपी-कांग्रेस से आजिज आ चुकी राजस्थान की जनता विकल्प के तौर पर बसपा को चुनेगी, ऐसा विश्वास है। ये हम साबित कर चुके हैं। जनता बसपा को विकल्प के रूप में देख रही है। पार्टी अपने बलबूते पर चुनाव में मैदान उतर रही है। पार्टी का जनाधार बढ़ा है और रणक्षेत्र भी बढ़ेगा। -सीताराम मेघवाल, प्रदेशाध्यक्ष, बसपा