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उत्तराखंड बाढ़: प्राकृतिक आपदा के बाद पीड़ितों पर लुटेरों की मार

गुप्तकाशी, उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में फंसे लोगों को बचाने का दौर जारी है। हजारों लोग बचाए गए हैं, लेकिन जो लोग बड़ी मुश्किल से बाहर आए हैं, उनकी कहानी बहुत दर्दनाक है।

गुप्तकाशी में थके हारे बैठे लोग मध्य प्रदेश से केदारनाथ यात्रा के लिए आए थे, लेकिन इस आपदा में फंस गए। इनमें से एक रामप्रसाद हैं, जिनकी पत्नी इनकी आंखों के सामने मौत के मुंह में समा गई। इसके बाद इन्होंने जो सहा उसे सुनकर कोई भी सिहर जाए। ये लोग न सिर्फ जिंदगी बचाने के लिए लडे़, बल्कि इनको हथियारबंद लोगों से भी मुकाबला करना पड़ा, जो इनका सब कुछ लूटकर ले गए। ये लोग तीन दिन, तीन रात लगातार चलते रहे, पैरों में छाले पड़ गए और पत्तों को जूतों में घुसाकर उन्हें चलने लायक बनाया। इन लोगों ने भूखे-प्यासे रहकर बड़ी मुश्किल से अपनी जना बचाई। रुद्रप्रयाग के पुलिस अधीक्षक ने भी लूटपाट की बात मानी है। बाढ़ के दौरान जान बचाने के लिए गौरीकुंड में मौजूद कई यात्रियों को आसपास की पहाड़ियों में शरण लेनी पड़ी, जहां वे दो दिन तक बिना पानी और खाने के रहे। बाद में राहतकर्मियों ने इन्हें बाहर निकाला। उत्तराखंड में तीर्थयात्रा करने गए गुजरात के करीब 40 श्रद्धालु सुरक्षित अहमदाबाद पहुंच गए। ये लोग गंगोत्री तक गए थे और बाढ़ के बाद फंस गए। पांच दिनों तक इनमें से कई को भूखे रहना पड़ा। कहीं खाने−पीने की चीजें मिलीं भी, तो उसके लिए उनसे बेहद ज्यादा दाम वसूले गए। ये सभी लोग पहले हरिद्वार आए, जहां से गुजरात सरकार ने हवाई जहाज से इन्हें वापस गुजरात भेजने की व्यवस्था की। अहमदाबाद लौट कर आए इन लोगों का कहना है कि भगवान किसी को ऐसे दिन न दिखाए। , , ,

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